आजकल उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर कई समस्याओं का घर बन जाना एक आम बात हो गई है। जोड़ों की समस्या आते ही बुजुर्ग लोग समझने लगते हैं की अब बुढ़ापा आ गया है,कुछ ऐसा ही मंजर दिल्ली के रहने वाले सत्य प्रकाश शर्मा जी के साथ देखने को मिला।
जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, और कई परेशानियों की वजह से ये सालों तक बिस्तर पर लेटे रहने के लिए मजबूर हो गए थे। सत्यप्रकाश जी बड़े ही खुशमिजाज और मिलनसार व्यक्ति हैं, जो की पेशे से एक टीचर भी हैं। इनके जीवन में भी एक समय ऐसा आया जब वह काफी परेशान रहने लगे थे। अजीब-अजीब से ख्याल इनके मन में आते थे। लेकिन फिर उन्हें उम्मीद की किरण नजर आई। उन्हें लगने लगा कि शायद उनका कमर का दर्द और घुटनों का दर्द कम हो जाएगा। आइये जानते हैं इस पूरी कहानी के बारे में कि उन्हें कैसे दर्द में राहत मिली?
जानें दिल्ली के सत्यप्रकाश जी की सच्ची कहानी?
दिल्ली के वेस्ट गोंडा (के-ब्लॉक, गली नंबर दो) के रहने वाले 70 वर्षीय श्री सत्यप्रकाश शर्मा जी एक रिटायर्ड सरकारी स्कूल टीचर हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन बच्चों को शिक्षा देने में बिताया। उनकी लाइफ बहुत ही अच्छी और एक्टिव थी। वह रोज समय से साइकिल चलाकर स्कूल आते-जाते थे और 65 साल की उम्र तक उन्हें शरीर में कभी कोई बड़ी तकलीफ या परेशानी नहीं हुई।लेकिन आज से करीब कुछ समय पहले उनकी जिंदगी में एक ऐसा दुखद मोड़ आया, जिसने उनकी पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया। रोज की तरह जब वह अपनी साइकिल से स्कूल जा रहे थे, तो अचानक एक हादसा हुआ और उस हादसे मे उनकी दाहिनी कमर के की हिस्से में काफी चोट आई। उस दिन के बाद से उनके शरीर में एक ऐसा दर्द शुरू हुआ, जिसने उन्हें देखते ही देखते बिस्तर पर लाकर रख दिया। इसके बाद उनके लिए उठना-बैठना और चलना मुश्किल हो गया। दर्द इतना बढ़ गया कि वो अपने बिस्तर से सिर्फ छह कदम दूर टॉयलेट तक जाने में भी असमर्थ थे। लगभग एक साल से ज़्यादा समय तक वह लगातार सिर्फ बिस्तर पर सीधे लेटे रहे। उनके बेटे ने सत्यप्रकाश जी के साथ दिल्ली के कई डॉक्टरों के चक्कर काटते रहे। उन्होंने दिल्ली के कई अस्पतालों के डॉक्टरों को दिखाया, सलाह ली। जिसके बाद पता चल गया कि उनकी नस दब गई है, तो कोई कुछ और वजह बताता।
आपको बता दें लगभग चार साल तक प्रयास और भाग-दौड़ करने के बावजूद उनके दर्द में कोई आराम नहीं था। कमर दर्द से तो वह परेशान थे ही पर थोड़े समय बाद घुटनों का दर्द भी उनसे सहन नहीं हो रहा था। दर्द इतना बढ़ गया कि एक कदम चलने के लिए भी वह मोहताज हो गए थे। एक तो कमर दर्द और ऊपर से घुटनों का दर्द उनके लिए झेलना काफी मुश्किल हो गया था। पर कहते है न भगवान अगर सभी रास्ते बंद करता है तो एक रास्ता जरूर खोल देता है। ऐसा ही इनके साथ भी हुआ था जब वो हकीम जी के साथ जुड़े और उन्होंने उनकी यूनानी बूटी के बारे में सुना तो उन्हें जीवन मे एक नई राह मिली! पर वो हकीम जी तक पहुँचे कैसे? ये जानने के लिए पहले ये जान लेते है की उन्हें अपनी इस दिक्कत की वजह से और क्या- क्या समस्या झेलनी पड़ी?
क्या परेशानी थी सत्यप्रकाश जी को जानिए यहाँ!
- कमर दर्द की वजह से बिस्तर पर पूरी तरह लाचारी से पड़े रहते।
- घुटनों के दर्द की वजह से एक कदम बढ़ना भी मुश्किल था और हमेशा वह दूसरों पर निर्भर रहते।
- उठते-बैठते समय उनके कमर और जोड़ों में काफी दर्द होता था।
सत्यप्रकाश जी को कैसे मिला हकीम साहब का साथ?
जब हर तरफ से निराशा हाथ लग रही थी और पूरा परिवार हिम्मत हार चुका था, तब एक दिन सत्यप्रकाश जी ने टीवी पर यूनानी के मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब का का बहुचर्चित शो सेहत और जिंदगी देखा। उस शो में उन्होंने जब कई लोगों के अनुभवों और उनकी परेशानी मे आराम मिलते देखा तो सत्यप्रकाश जी के मन में भी एक विश्वास जागा कि उनके जीवन में भी सुधार आ सकता है। इसलिए उन्होंने तुरंत टीवी स्क्रीन पर आ रहे नंबर पर संपर्क किया और हकीम जी की टीम को अपनी सारी परेशानी को अच्छे से बताया टीम ने उनकी पूरी बात को समझने के बाद उन्हें गोंद सियाह का इस्तेमाल करने को कहा सत्य प्रकाश जी ने बिना किसी देरी के इस यूनानी बूटी को ATIYA HERBS की ऑफिशिल वेबसाइट से मँगवाया जिसके बाद सत्य प्रकाश जी रोज सुबह-शाम टीम द्वारा बाताए गए अनुसार उन बूटियों का इस्तेमाल करने लगे जिसके बाद उन्हे काफी हद तक आराम मिलने लगा। इसे देख वह काफी खुश हुए।
दर्द से राहत के बाद इनके जीवन में आए महत्वपूर्ण बदलाव:
- शरीर में नई ताकत आने लगी और दर्द कम हो गया।
- अब वह आसानी से चल लेते हैं और बेफिक्र होकर दौड़ लगा रहे हैं।
- कमर और जोड़ों की तकलीफ पहले से बहुत कम हो गई ।
सत्यप्रकाश जी का अनुभव: हकीम साहब से मिलने के बाद क्या बदला?
आज 70 साल की उम्र में भी सत्यप्रकाश जी के चेहरे की चमक और उनका आत्मविश्वास देखने लायक है। जो इंसान कभी बिस्तर से उठकर दो कदम चलने के लिए भी तरसता था, आज उनकी फुर्ती पहले से अच्छी हो गई है वह बिना किसी सहारे के सीढ़ियां फटाफट चढ़ जाते हैं, मोहल्ले में तेज चल लेते हैं और एक ही हाथ से भारी से भारी वजन भी आसानी से उठा लेते हैं। उन्हें न सिर्फ दर्द में आराम मिला बल्कि उन्हें सांस की दिक्कत और दिल की परेशानी में भी राहत मिली इसके लिए उन्होंने जैतून का सिरका भी लिया। अब वह पहले से काफी बेहतर हैं।
आज वह नम आंखों से हकीम सुलेमान खान साहब का शुक्रिया अदा करते हैं जिन्होंने उन्हें यह नया जीवन दिया है। सत्यप्रकाश जी का कहना हैं कि हालात चाहे कितने भी खराब हों, मन से कभी हार नहीं माननी चाहिए। असली ताकत हमारे हौसले में होती है, इसलिए हमेशा भरोसा रखना चाहिए। इसके साथ वह दूसरे लोगों को अगर परेशानी में देखते हैं तो हकीम जी के घरेलू नुस्खे अपनाने की सलाह देते हैं। आज जो खुशहाल जिंदगी वो गुजार रहे हैं वो हकीम जी की मदद से संभव हो पाया है। वह यही चाहते हैं कि हकीम जी हमेशा स्वस्थ और खुशहाल रहे और इसी तरह लोगों की मदद करते रहें।
गोंद सियाह क्या है ?
यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्य है जो समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। इस पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है उसे गोंद सियाह कहते हैं, यह बहुत ही पौष्टिक होता है और सूखने पर काला और ठोस हो जाता है, इस गोंद में उस पेड़ के गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई समस्याओं को हम से दूर रखता है। इसकी खुराक को हकीम साहब या उनकी संस्था के यूनानी विशेषज्ञों द्वारा बताई गयी मात्रा में ही लेना चाहिए। ज्यादा या कम मात्रा में इसका सेवन इसकी काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
असली गोंद सियाह मंगाने के दिए गए नंबर पर संपर्क करें।
011 6120 2463
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5
