जीवन में जब मुश्किलों का सामना करना पड़े तो जिंदगी जीना आसान नहीं होती और ऐसे में जब बुढ़ापे में दर्द की परेशानी झेलनी पड़े तो जिंदगी जीना और भी मुश्किल हो जाता है। ऐसी ही कहानी है वाराणसी के मैदागिन क्षेत्र के बुलानाला में रहने वाली गिरजा देवी जी की, जो कमर के दर्द से काफी परेशान थी। इनके लिए उठना-बैठना काफी मुश्किल हो गया था।
आपको बता दें भगवान का नाम लेना और पूजा-पाठ करना गिरजा देवी जी की रोज की दिनचर्या का हिस्सा था। लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब जमीन पर बैठकर कुछ देर पाठ करना भी उनके लिए मुश्किल हो गया था। बैठने के लिए तकिया लगाना पड़ता था और उठने के लिए सहारे की जरूरत पड़ती थी। धीरे-धीरे यह परेशानी उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया था। पर आख़िर कौन है गिरजा देवी? चलिए जानते हैं।
आख़िर कौन है गिरजा देवी? जानें यहाँ!
वाराणसी के मैदागिन क्षेत्र के बुलानाला में रहने वाली गिरजा देवी जी जिनकी उम्र 75 वर्ष से ज्यादा है और वो अपने परिवार के साथ रहती है। उनका कहना है कि कुछ साल पहले उनकी कमर में ऐसी परेशानी शुरू हुई कि धीरे-धीरे उनके आम जीवन पर भी असर पड़ने लगा। उन्हें ऐसा महसूस होता था जैसे रीढ़ की हड्डी के पास कोई गांठ या फोड़े जैसा दर्द हो रहा हो। शुरुआत में उन्होंने इसे एक मामूली दर्द समझा, लेकिन समय के साथ यह परेशानी बढ़ती चली गई। हालात ऐसे हो गए थे कि जमीन पर बैठना मुश्किल हो गया था। अगर पूजा-पाठ के लिए बैठती भी थीं तो पीछे तकिया लगाकर बैठना पड़ता था। ज्यादा देर बैठने पर परेशानी बढ़ जाती थी। सबसे बड़ी दिक्कत तब होती थी जब बैठने के बाद उठना पड़ता था। कई बार उन्हें सहारे के बिना उठना मुश्किल लगता था।
चलने-फिरने में भी उन्हें काफी परेशानी होने लगी थी। घर के अंदर भी धीरे-धीरे चलना पड़ता था। अगर रात में उठकर कहीं जाना होता तो दीवार पकड़कर चलना पड़ता था। कई बार 10-12 कदम चलने के बाद ही थकान और परेशानी महसूस होने लगती थी। परिवार वाले भी उनकी यह हालत देखकर चिंतित रहने लगे थे। गिरजा देवी जी की बहू बताती हैं कि परिवार ने उनकी परेशानी को कम करने के लिए कई प्रयास किए। अलग-अलग जगहों से चीजें लाकर दी गईं। कुछ समय तक दवाइयों का सहारा भी लिया गया, फिर दूसरे तरीके भी अपनाए गए। लेकिन उन्हें वह सुकून नहीं मिल पाया जिसकी उन्हें तलाश थी। कुछ समय राहत मिलती थी, फिर वही परेशानी वापस शुरू हो जाती थी।
क्या थीं गिरजा देवी जी की परेशानियां? जानिए
- कमर में लगातार परेशानी बनी रहती थी।
- दीवार या सहारे के बिना चलना कठिन लगता था।
- 10-12 कदम चलने पर थकान महसूस होने लगती थी।
- पूजा-पाठ के दौरान पीछे तकिया लगाकर बैठना पड़ता था।
हकीम साहब की यूनानी बूटी बनी गिरीजा जी का सहारा।
वो कहते है न की डूबते हुए को तिनके का सहारा भी काफी होता है ऐसा ही गिरजा जी के साथ हुआ था, गिरजा देवी जी बताती हैं कि एक दिन वह घर पर टीवी देख रही थीं। उसी दौरान उनकी नजर हकीम सुलेमान खान साहब के बहुचर्चित शो सेहत और जिंदगी पर पड़ी। उस शो में लोगों को अपने अनुभव को शेयर कर रहे थे की किस तरह उन्हें यूनानी बूटी से अपनी परेशानी में राहत मिली है, जिसके बाद उन्होंने अपनी बहू से इस बारे में बात की और फिर परिवार ने आगे कदम बढ़ाया। और बिना देरी किए उन्होंने टीवी पर आ रहे नंबर पर कॉल किया और हकीम जी की टीम से बात कर उन्हें सारी परेशानियां बताई, जिसके बाद टीम ने उन्हें गोंद सियाह अपनाने की सलाह दी इसके बाद बिना किसी देरी के उन्होंने ATIYA HERBS की ऑफिशियल वेबसाइट से गोंद सियाह आर्डर किया और और उन्होंने उसका सेवन समयानुसार करना शुरू किया, और लगभग कुछ महीने के अंदर ही उन्हें काफी हद तक आराम मिलने लगा।
गिरजा देवी जी का कहना है कि समय के साथ उन्हें अपने जीवन में बदलाव महसूस होने लगे। पहले जहां बैठने और उठने में काफी परेशानी होती थी, वहीं अब वह पहले से ज्यादा आसानी से अपने काम कर पाती हैं। परिवार वालों ने भी उनके अंदर आए इस बदलाव को महसूस किया। आज स्थिति पहले से काफी बेहतर है। गिरजा देवी जी बताती हैं कि अब वह बिना पीछे तकिया लगाए भी काफी देर तक बैठ सकती हैं। वह आराम से पूजा-पाठ कर लेती हैं और एक-दो घंटे तक बैठकर पाठ भी कर लेती हैं। पहले जहां कुछ कदम चलना भी मुश्किल लगता था, वहीं अब वह अपने आसपास के काम खुद करने लगी हैं।
आपको बता दें की उनके बेटे ने ये भी बताया की यूनानी बूटी के सेवन के बाद वह महाकालेश्वर के दर्शन के लिए भी गईं और वहां एक सप्ताह तक रहीं। परिवार का कहना है कि पहले जिस तरह की परेशानी थी, उस समय ऐसा सोचना भी मुश्किल था। चलिए अब जानते है की उनकी जिंदगी में और क्या बदलाव आये?
दर्द से राहत मिलने के बाद जिंदगी में आए नए बदलाव
- पहले से ज्यादा आसानी से उठ-बैठ पाती हैं।
- गिरीजा जी अब पूजा-पाठ के लिए लंबे समय तक बैठ लेती हैं।
- चलने-फिरने में पहले जैसी परेशानी नहीं होती क्योंकि उनका दर्द काफी कम हो गया है।
आज गिरजा देवी जी अपने जीवन में आए बदलाव से खुश हैं। उनके परिवार वाले भी उन्हें पहले से बेहतर देखकर राहत महसूस करते हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि अब वह पहले की तुलना में ज्यादा आराम महसूस करती हैं और अपने रोजमर्रा के काम भी बेहतर तरीके से कर पा रही हैं। गिरजा देवी जी का कहना है कि जब उन्हें लगा था कि अब शायद यह परेशानी हमेशा साथ रहने वाली है, तब उन्हें फिर से उम्मीद मिली। आज वह अपने अनुभव को लोगों को भी बताती हैं और लोगों को उनकी समस्याओं के लिए हकीम साहब के घरेलू नुस्खों को अपनाने की सलाह देती है। आज जो वह खुशहाल जीवन गुजार रही हैं वह हकीम जी की मदद से ही संभव हो पाया है। इसी के साथ वह अपने जीवन में आए बदलाव के लिए हकीम सुलेमान खान साहब का तहे दिल से धन्यवाद करती है।
गोंद सियाह क्या है ?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के औषधीय गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई बीमारियों को हम से दूर रख सकता है।
असली गोंद सियाह मंगाने के दिए गए नंबर पर संपर्क करें।
011 6120 5381
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5
